छत्तीसगढ़

बाल विवाह पर प्रशासन का एक्शन मोड, 2 नाबालिग शादियां रुकवाईं, परिवारों को दी चेतावनी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही.

देश के कई राज्यों में अक्षय तृतीया के अवसर को विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसके चलते इस अवधि में बाल विवाह के मामले भी सामने आते हैं। इसी के मद्देनजर जिले में प्रशासन और बाल संरक्षण विभाग की सतर्कता के चलते दो अलग-अलग मामलों में नाबालिगों के संभावित बाल विवाह को समय रहते रोक दिया गया।

सूचना प्राप्त होते ही संबंधित टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत दोनों विवाहों को रुकवा दिया।

पहला मामला: सोन बचरवार पंचायत
पहला मामला पेंड्रा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सोन बचरवार का है, जहां एक नाबालिग बालक की शादी की तैयारी चल रही थी। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने तत्काल टीम को मौके पर भेजा। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि बालक की उम्र 17 वर्ष 10 माह 14 दिन है, जो निर्धारित कानूनी आयु 21 वर्ष से कम है। इसके बाद टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विवाह रुकवाया।

दूसरा मामला: गुम्मा टोला में कार्रवाई
दूसरा मामला ग्राम पंचायत गुम्मा टोला का है, जहां थाना गौरेला क्षेत्र में एक अन्य नाबालिग के विवाह की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से मिली। टीम ने मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की, जिसमें बालक की उम्र 20 वर्ष 9 माह 7 दिन पाई गई, जो बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत निर्धारित उम्र से कम है। इसके चलते इस विवाह को भी रोक दिया गया।

परिजनों को दी गई समझाइश
दोनों मामलों में टीम ने बालक-बालिका के माता-पिता और परिवारजनों को समझाइश दी तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही, भविष्य में बाल विवाह नहीं करने के लिए घोषणा पत्र और पंचनामा पर हस्ताक्षर भी कराए गए।

टीम की सराहनीय भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड हेल्पलाइन, गौरेला पुलिस और पेंड्रा पुलिस की भूमिका सराहनीय रही। प्रशासन की इस तत्परता से एक बार फिर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाने का संदेश गया है।

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